Fast Track Merger (FTM) का प्रावधान Companies Act, 2013 की Section 233 के तहत पेश किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य छोटी कंपनियों और स्टार्टअप्स को National Company Law Tribunal (NCLT) की लंबी प्रक्रिया से बचाकर Regional Director (RD) के माध्यम से विलय की अनुमति देना है। हाल ही में, Ministry of Corporate Affairs ने 04 सितंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण नोटिफिकेशन जारी किया। इस Amendment Rules, 2025 के माध्यम से अब Unlisted Companies और विदेशी होल्डिंग कंपनियों की भारतीय सहायक कंपनियों को भी कुछ शर्तों के साथ इस दायरे में शामिल किया गया है। अब जिन गैर-सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बकाया ऋण 200 करोड़ रुपये से कम है, वे Auditor Certificate और Form CAA-10A जमा करके इस त्वरित मार्ग का लाभ उठा सकती हैं।
फास्ट ट्रैक मर्जर की प्रक्रिया कई चरणों में विभाजित है, जिसमें सबसे पहले Board Approval और Registered Valuer की नियुक्ति अनिवार्य है। इसके बाद, कंपनियों को Registrar of Companies (RoC) और Official Liquidator को Form CAA-9 के माध्यम से नोटिस भेजना होता है। विलय की सफलता के लिए कम से कम 90% शेयरधारकों और 90% लेनदारों (Creditors) की मंजूरी आवश्यक है। प्रक्रिया के अंत में, सभी आवश्यक दस्तावेज जैसे Declaration of Solvency (CAA-10) और बैठक की रिपोर्ट Form RD-1 के साथ क्षेत्रीय निदेशक को जमा की जाती है। यदि 60 दिनों के भीतर कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होती है, तो इसे Deemed Approval माना जाता है। यह ढांचा भारत में Ease of Doing Business को बढ़ावा देने और Corporate Restructuring को अधिक किफायती और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।