GST ITC Fraud ED Filed Chargesheet

Rajesh Kumar at  2025-07-12  at 09:17:00
GST ITC Fraud ED Filed Chargesheet
GST ITC Fraud ED Filed Chargesheet

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को रांची की विशेष PMLA अदालत में ₹734 करोड़ के GST इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले में चार लोगों – शिवा कुमार देवोरा, मोहित देवोरा, अमित कुमार गुप्ता और अमित अग्रवाल – के खिलाफ अभियोग पत्र (चार्जशीट) दायर किया। ED की कार्रवाई GST अधिनियम, 2017 की धारा 132 के तहत दर्ज DGGI, जमशेदपुर की शिकायतों पर आधारित थी, जिसमें फर्जी कारोबार और नकली इनवॉइस के जरिए व्यापक धोखाधड़ी के संकेत मिले थे। शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी व्यक्तियों ने संगठित तरीके से एक सिंडिकेट तैयार किया, जिसमें लगभग 135 शेल कंपनियों की मदद से फर्जी व्यापारिक लेनदेन दर्शाए गए। इन कंपनियों ने कोई वास्तविक माल या सेवाएं बेचे बिना करोड़ों रुपये के नकली इनवॉइस जारी किए। इन नकली इनवॉइस के आधार पर फर्जी ITC उत्पन्न किया गया, जिसे कमीशन पर असली व्यापारिक संस्थानों को बेचा गया, जिससे उनका टैक्स बकाया कम दिखाया गया। इन गतिविधियों से न केवल सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान हुआ, बल्कि जीएसटी प्रणाली की पारदर्शिता और भरोसे पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया। आरोपियों ने बैंक अकाउंट्स और डिजिटल दस्तावेजों में भी इस फर्जीवाड़े को छुपाने की कोशिश की, लेकिन ED की जांच में यह नेटवर्क उजागर हो गया। आरोपियों द्वारा बनाए गए नकली कारोबार में अलग-अलग राज्यों में पंजीकृत फर्में, अलग-अलग GSTIN नंबर और दस्तावेज़ों का उपयोग किया गया ताकि जांच एजेंसियों को गुमराह किया जा सके। यह घोटाला केवल टैक्स चोरी नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक अपराध का उदाहरण है, जिसमें मनी-लॉन्ड्रिंग के भी गंभीर संकेत मिले हैं। इस मामले में GST अधिनियम की धारा 122 और धारा 69 के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं, जो टैक्स चोरी और गिरफ्तारी की शक्ति से जुड़े हैं।

ED की जांच के दौरान झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की गई, जहां विभिन्न आरोपियों और उनकी कंपनियों के ठिकानों पर दस्तावेज़, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइसेस जब्त किए गए। इस कार्रवाई में ₹5.29 करोड़ की अचल संपत्ति अटैच की गई, ₹8.98 करोड़ नकद जब्त किया गया और ₹62.90 लाख के बैंक बैलेंस को फ्रीज किया गया। जब्त दस्तावेजों में नकली लेजर, बिल बुक्स, फर्जी खरीदी-बिक्री के रिकॉर्ड और करोड़ों के नकली GST चालान शामिल थे, जिनसे यह पुष्टि होती है कि आरोपी एक संगठित फर्जी बिलिंग सिंडिकेट चला रहे थे। ED ने बताया कि आगे की जांच में उन असली कंपनियों और व्यक्तियों की भी पहचान की जा रही है, जिन्होंने इन फर्जी कंपनियों के माध्यम से ITC खरीदा और इसका इस्तेमाल अपनी GST देनदारियां कम करने के लिए किया। इस घोटाले ने न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाया बल्कि टैक्स प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी असर डाला है, क्योंकि इतनी बड़ी रकम के फर्जी लेनदेन ने सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया। ED का कहना है कि मनी-लॉन्ड्रिंग के एंगल की भी गहनता से जांच हो रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अवैध रूप से अर्जित राशि कहां और कैसे निवेश की गई। GST कानून के तहत धारा 132 में ऐसे अपराधों के लिए पांच साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है, जबकि धारा 69 अधिकारियों को ऐसे मामलों में गिरफ्तारी की शक्ति देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस के बाद सरकार को GST सिस्टम में और कड़े निगरानी उपायों की जरूरत है, ताकि फर्जी बिलिंग, शेल कंपनियों और इनपुट टैक्स क्रेडिट के दुरुपयोग पर लगाम लगाई जा सके। यह मामला भारत में GST फ्रॉड के सबसे बड़े मामलों में से एक माना जा रहा है, जिसने वित्तीय धोखाधड़ी की नई चुनौतियों को सामने लाकर सरकार को सख्त कदम उठाने पर मजबूर किया है।


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