यदि आपका व्यवसाय कई राज्यों में फैला है, तो साझा इनपुट सेवाओं पर मिले इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को ठीक से बाँटने के लिए Input Service Distributor (ISD) की व्यवस्था अत्यंत उपयोगी है। ISD के माध्यम से मुख्य कार्यालय (हेड ऑफिस) उन सभी शाखाओं के लिए उपयोग की जाने वाली साझा सेवाओं के ITC को वितरित करता है। उदाहरण के लिए, बड़ी कंपनियाँ अक्सर विज्ञापन, सॉफ़्टवेयर लाइसेंस या कंसल्टेंसी जैसी सेवाएँ केंद्रीय रूप से खरीदती हैं, जिनका लाभ सभी शाखाओं को मिलता है लेकिन बिल केवल हेड ऑफिस के नाम पर आता है। पहले ISD के ज़रिए ITC का वितरण वैकल्पिक था। लेकिन GST कानून में हालिया संशोधन के बाद इसे अनिवार्य कर दिया गया है। 1 अप्रैल 2025 से, यदि आपके व्यवसाय को साझा सेवाओं पर ITC मिलता है, तो आपको अलग से ISD के रूप में पंजीकरण कराना ज़रूरी है। इस बदलाव का उद्देश्य ITC का न्यायसंगत बँटवारा सुनिश्चित करना है, ताकि सभी राज्यों को उचित कर लाभ मिल सके। साथ ही, Reverse Charge Mechanism (RCM) के तहत मिलने वाला ITC भी अब ISD के जरिए ही बाँटना होगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और आसान हो जाएगी।
संशोधित प्रक्रिया के तहत, Input Service Distributor (ISD) के रूप में पंजीकरण कराने के बाद आपको कुछ महत्वपूर्ण अनुपालनों का ध्यान रखना होगा। सबसे पहले, ISD के लिए एक अलग GST पंजीकरण (नया GSTIN) प्राप्त करें। सुनिश्चित करें कि सभी साझा सेवाओं के इनवॉयस इसी ISD GSTIN पर आएँ, ताकि उनका ITC बाद में उचित रूप से वितरित किया जा सके। इसके बाद प्रत्येक माह Form GSTR-6 में रिटर्न दाखिल करें, जिसे अगले माह की 13 तारीख तक जमा करना होता है। इस रिटर्न में आपको प्राप्त ITC और विभिन्न शाखाओं में उसके वितरण का विवरण देना होगा। ITC वितरण की गणना नियमानुसार टर्नओवर के आधार पर करें, ताकि प्रत्येक शाखा को उसके हिस्से का क्रेडिट मिल जाए। ध्यान रखें कि कुल उपलब्ध क्रेडिट से अधिक का वितरण नहीं किया जा सकता, और क्रेडिट उसी माह में वितरित करें जिसमें वह प्राप्त हुआ है। नए नियमों के तहत अब RCM के तहत आने वाली सेवाओं का ITC भी ISD के माध्यम से ही बांटना होगा। अतः सुनिश्चित करें कि आपका एकाउंटिंग सिस्टम और कर्मचारी इन परिवर्तनों के लिए तैयार हैं, ताकि ISD फाइलिंग प्रक्रिया का पालन सुचारू रूप से किया जा सके।